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Friday, September 4, 2009
Why are being called with different names in each state
It is so because we are a tribe dispersed not just across different states but different countries. Hence we are identified as Romas in rest of the world. As we dispersed several centuries ago our people picked up different vocations in different places. Those days names were based on occupations. Between Andra (Lambada and Sugali) and Karnataka (normally Lambani in south Karnataka and Banjara in north Karnataka) either we would have called ourselves like that or others Koars may have named us.
With Warm Regards
G.Pandu Naik
PhDSenior Manager-Learning and DevelopmentKarle Group of Companies151 Industrial Suburb,
YeshwanthpurBangalore-560 022
Email pandunaik@karlegroup.com
Phone 91 80 41285311 to 15
Mobile Phone 9008989051
Wednesday, August 26, 2009
Honor of Goaar Students at Sitharama Thanda
Honor of Goaar Students at Sitharama Thanda
Guests and Teachers at the Independence Day Function organized by Government Higher Primary School, Sitharama Thanda, HOSPET (TQ), BELLARY (DIST), KARNATAKA (STATE).


Engineer Laxman L.D. presenting award to a boy student at the function organized by Government Higher Primary School, Sitharama Thanda, HOSPET (TQ), BELLARY (DIST), KARNATAKA (STATE).
Jai Shri Sevalal Ji Maharaj! This is L. Krishna Naik, Head Master, Govt. Higher Primary School, Sitharama Thanda. My school function Prize photos about function on 15.08.2009 through Shri Laxman L.D. Engineer.
some pictures of Prizes to best students in Government Higher Primary School, Sitharama Thanda, HOSPET (TQ), BELLARY (DIST), KARNATAKA (STATE) for TOPPER in Examination, art, sports, good handwriting, good reading, full attendence, clean dress etc on the eve of 62nd Independence Day of India and 63rd flag hoisting day on 15.08.2009. It is to motivate the students, teachers, parents, thanda leaders and gram panchayat president; members towards the upliftment of educationally backward students in thandas.Posted on August 17, 2009--------------------------------------------------------------------------------------------
Your & Yours caring friend
LAXMAN L.D, EngineerD.MT.E(Mettalurgy),
B.COM, LLB, (M.A-History)Kalyani Steels Ltd.
(Koppal tq & dist)Hopset, Bellary, KARNATAKACell No:09480729418Email.Id:ldlaxman.banjara@gmail.com
Tuesday, August 25, 2009
Ek vejo goar banjara.................
regards,
Madhu mlathi.
bangalore, India
बंजारा समाज का इतिहास सदियों पुराना हैं
refrence
jagran
जातीय पंचायत की बलि

भोपाल से
अब उनके फैसले को चुनौती देने वाला कोई नहीं है.भोपाल के बंजारा समुदाय ने जब अपने समाज की संगीता ऊर्फ विजया और उसके परिवार वालों का हुक्का पानी बंद कर दिया तो आठवीं पास संगीता बंजारा पंचायत के इस फैसले के खिलाफ उठ खड़ी हुईं. उन्होंने बंजारा पंचायत के फैसले को चुनौती दी.पंचायत ने फैसला सुनाया था कि अगर उन्हें बंजारा समुदाय में वापसी चाहिए तो पूरे समुदाय को मांस और शराब की दावत के साथ-साथ 5100 रुपए का जुर्माना भी चुकाना होगा. संगीता ने इससे इंकार कर दिया.
सामाजिक प्रताड़ना से तंग आकर संगीता ने अंततः आत्महत्या कर ली.
लेकिन समाज की प्रताड़ना बढ़ी तो वह टूट गई. बंजारा पंचायत के फैसले को चुनौती देने वाली संगीता ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली. जिस मुंहबोले भाई के कारण उन्होंने आत्महत्या की, वह भी बहन की मौत का सदमा सह नहीं सका और उसने भी जान दे दी.
अंतरजातीय विवाह के कारण आत्महत्या का यह मामला उस प्रदेश की राजधानी में हुआ, जहां गणतंत्र दिवस के दिन अंतरजातीय विवाह करने वालों को पुरस्कृत करने की परंपरा रही है.गुनाहभोपाल के चांदबड़ इलाके में रहने वाली बंजारा समुदाय की संगीता को उसकी मां की मौत के बाद पड़ोस के ब्राह्मण परिवार ने बेटी की तरह पाला था. बाद में उसकी संगीता की शादी अपने ही समुदाय के परसराम सिंह से हुई. बंजारा समुदाय से विवाद की शुरुवात तब हुई जब संगीता ने ब्राह्मण परिवार के अपने मुंहबोले भाई रंजन पांडे की शादी एक बांजारा लड़की रुचि से करायी. रंजन और रुचि दोनों ही विकलांग थे और दोनों को लगा कि उनका जीवन एक-दूसरे के साथ खुशी-खुशी कट जाएगा.
लेकिन बंजारा समाज के लोग इस अंतरजातीय विवाह से बेहद खफा थे. समाज के लोगों ने संगीता और ऑटो चला कर गुजारा करने वाले उसके पति परसराम सिंह को चेतावनी दी कि वे रंजन पांडे और रुचि को आश्रय देना बंद करें. पेशे से कंप्यूटर ऑपरेटर रंजन को जान से मारने की धमकी भी दी गई.बंजारा समाज की लड़की को अपनी बहु बनाने वाली रंजन की मां कहती हैं-“ संगीता और मेरी बहु रुचि पर बंजारा समाज का बहुत दबाव था.मेरे बेटे रंजन को भी बंजारा समाज के लोग गालियां बका करते थे.बंजारा समाज के लोग इस विवाह के लिए संगीता को जिम्मेवार मानते थे.”सामाजिक बहिष्कार1 जून को बंजारा समाज ने अपनी पंचायत बुलाई और परसराम सिंह और संगीता के परिवार को समाज से बेदखल करने का फैसला सुना दिया. बंजारा समाज ने शर्त रखी कि अगर परसराम सिंह का परिवार पूरे समाज को मांस और शराब की दावत दे और हरजाना के रुप में 5100 रुपए की रकम दे तो यह फैसला वापस लिया जा सकता है.संगीता इसके लिए तैयार नहीं हुईं. फिर समाज का दबाव बढ़ता चला गया. संगीता ने इस फैसले के खिलाफ जगह-जगह गुहार लगाई. विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्ध घुमक्कड़ जाति विकास अभिकरण के प्रदेशाध्यक्ष नारायण सिंह बंजारा ने संगीता को आश्वस्त किया कि यह समाज का आंतरिक मामला है और इसे समाज में ही निपटा लिया जाएगा. इसके लिए उन्होंने 12 जून तक की तारीख भी मुकर्रर की लेकिन नारायण सिंह ने इस मामले में खामोशी की चादर ओढ़ ली.बंजारा समाज का दबाव जब ज्यादा तेज़ हुआ तो संगीता और उसके मुंहबोले भाई रंजन ने हार मान ली. उन्होंने भोपाल के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर स्पष्ट कर दिया कि अगर उनकी रक्षा नहीं की जाएगी तो वे आत्महत्या कर लेंगे.आत्महत्या की चेतावनीआम आदमी के सरोकारों को हाशिये पर रखने वाले अफसरों के लिए यह एक आम पत्र भर था और उसका हश्र भी वही हुआ.कहीं से कोई सहायता नहीं मिलने पर समाज की प्रताड़ना से तंग आ चुकी संगीता ने 24 जून को आत्महत्या कर ली. संगीता की आत्महत्या ने सबको हिला कर रख दिया. अपने मृत्यु पूर्व पत्र में संगीता ने अपनी मौत के लिए बंजारा समाज के लोगों को जिम्मेवार ठहराया था.संगीता की मौत का जिस पर सबसे अधिक असर पड़ा वो था उसका मुंहबोला भाई रंजन. उसी शाम रंजन ने भी आत्महत्या कर ली.महिला अधिकार मंच की सुश्री प्रार्थना मिश्र कहती हैं-“ यह कोई पहला मामला नहीं है, जब प्रशासन ने आम आदमी के गुहार की अनदेखी की. सागर के पीटीए अध्यक्ष शिवकुमार और बैतुल की पंच सुश्री उर्मिला बाई ने भी न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या कर लेने की इत्तला प्रशासन को पहले ही दी थी लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया. अंततः इन लोगों ने भी आत्महत्या कर अपनी जान गंवा दी. राज्य में इस तरह के अधिकांश मामले दलितों से जुड़े हुए हैं. ” संगीता की आत्महत्या के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्थानीय जन संगठनों ने अपनी कमर कसी है. संगीता के पति परशराम भी कहते हैं-“ हम बंजारा समाज के इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे.”लेकिन जिस सरकारी तंत्र को कार्रवाई करनी है, उसकी सफाई है कि इस मामले का उन्हें पता ही नहीं चला.
जिले के कलेक्टर का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और प्रताड़ना से संबंधित मामले पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिए जाते हैं. वहीं पुलिस अधीक्षक आत्महत्या से पूर्व किसी तरह की जानकारी मिलने से अपने को अनजान बता रहे हैं.जाहिर है, अंतरजातीय विवाह के कारण जातीय पंचायत की बलि चढ़ गए संगीता और रंजन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गए हैं. लेकिन इन सवालों में किसी की भी दिलचस्पी नहीं है. पुलिस की डायरी में मामला दर्ज हो गया है. अब सालों-साल अदालत में मुकदमा चलता रहेगा और फिर कमज़ोर स्मृतियों वाला समाज सब कुछ भूल जाएगा.
क्रीमी लेअर दाखल्याविरोधात आंदोलन
पंडित व राठोड यांना बंजारा समाज भूषण पुरस्कार
refrence,
loksatta
"नाईक यांच्याकडून बंजारा समाज विकासाचे कार्य"
यांनी बंजारा समाजाच्या गोरमाटी भाषेतून भाषण केले. अखिल भारतीय बंजारा समाजाचा दोन दिवसांचा उत्सव ह.भ.प. सावळाराम महाराज क्रीडासंकुलात आयोजित केला होता. यावेळी उपसभापती वसंत डावखरे, आयुक्त गोविंद राठोड, मोरसिंग राठोड, नगरसेवक नितीन पाटील, शिवाजी शेलार, शंकर पवार, बाळा म्हात्रे उपस्थित होते. बंजारा समाजाची डोंबिवलीत वास्तू होण्यासाठी आयुक्त राठोड यांनी एखादा प्लॉट या संस्थेला उपलब्ध करून द्यावा, डावखरे यांच्या प्रयत्नातून ही वास्तू उभी राहू शकते. पण तत्पूर्वी डावखरे यांना बळ द्या तुम्हाला ते शक्ती देतील, असा प्रचारही यावेळी नाईक यांच्याकडून करण्यात आला. बंजारा समाज हा दगड फोडण्याचे काम करतो. दगड फोडण्यासाठी त्याच्याजवळ जी शक्ती आहे ती शक्ती कोणालाही भेदू शकते. पण बंजारा समाज संघटित नसल्याने हा समाज भरडला जात आहे. प्रत्येक गोष्ट पैशाने होत नसते. हा समाज मोठय़ा प्रमाणावर संघटित होता. त्यासाठी निधीची गरज पडली नाही म्हणून विचाराने एक होण्याची गरज असल्याचे यावेळी आवाहन करण्यात आले. शिधावाटप पत्रिका तयार करताना येणाऱ्या अडचणी, नोकरी, व्यवसायातील लाभ मिळून देण्याची मागणी यावेळी करण्यात आली. देशात ७ कोटी बंजारा समाज आहे. दोनशे तांडे व्यवसायासाठी देशभर फिरतात. अडीच लाख लोक भटकत असतात. तीन लाख घरात वास्तव्य करून असतात. बंजारा समाज हा आंतरराष्ट्रीय मजूर होण्याची भीती यावेळी व्यक्त करण्यात आली.
refrence,
loksatta
Saturday, July 25, 2009
NEED FINANCIAL HELP FOR OUR COMMUNITY FILM

DEAR ALL,
Mobile:09440727809
Sunday, July 5, 2009
1st ever banjara caller tones

Regards,
Sree Chaitanya.





